अवसर मिलने पर देर क्यों ?

अवसर मिलने पर देर क्यों ?

कई बार हम मौकों की तलास में रहते तो है पर जब मौका आता है तब उसे अवसर में बदल नहीं पाते |  इसके पीछे का मुख्य कारण  है सजग न रहना और निर्णय करने में देरी  

क्या है मौका ?

एक सज्जन अपनी जीवनशैली से ज्यादा खुश नहीं थे , एक बार वो अपनी समस्या लेकर एक साधु के पास गए और अपनी व्यथा को उनके समक्ष रखा |  साधु ने एक उपाय बताते हुए कहा की अपने आस - पास नजर रखिये और एक दिन हाँथी आपके नजदीक से गुजरेगा | आपको उस हाँथी की पूंछ पकड़ कर चलते रहना है वो आपकी मंजिल तक आपको लेकर जायेगा | 

सज्जन प्रसन्न मन से अपने घर आ गए और उस दिन का इंतजार करने लगे की कब हाँथी गुजरे और मै  उसकी पूंछ पकड़ लूं |  ऐसा करते - करते जब कई दिन तक हाँथी नहीं आया तो उन्हें चिंता होने लगी कहीं साधु की बात झूठी तो नही ? लेकिन उन्होंने सोचा कि जब इतने दिन इंतजार किया तो थोड़ा और सही | 

अचानक एक दिन उसे एक हाँथी आता दिखाई दिया उसे देखकर सज्जन की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा और वो हाँथी के पास आने की प्रतीक्षा करने लगे |  जैसे ही हाँथी पास आया तो सज्जन ने देखा की हाँथी की पूंछ बहुत छोटी है तो पकडू या नहीं तभी एक दूसरा हाँथी भी उनकी तरफ आता दिखाई दिया | सज्जन ने इस उम्मीद में पहला हाँथी जाने दिया की शायद  दूसरे हाँथी की पूंछ ज्यादा लम्बी होगी और वह उसे पकड़ लेंगे | 

मौका मिलने पर लालच पर काबू

दूसरा हाँथी जब सज्जन के नजदीक आया तो उन्होंने देखा की हाँथी की पूंछ तो बड़ी है पर हाँथी बहुत दुबला है |  और उन्हें एक तीसरा हाँथी भी अपनी तरफ आता नजर आया | सज्जन ने बिना विचार किया लालच में आकर लम्बी पूंछ वाले हाँथी को भी जाने दिया | तीसरा हाँथी जैसे ही उनके पास आया और उसके पीछे कोई और हाँथी आता दिखाई नहीं दिया तो सज्जन पुरे मन से उसकी पूंछ पकड़ने का निश्चय कर आगे बढ़े परन्तु जब उसके नजदीक गए तो पाया की इस हाँथी का आकार तो बड़ा है देखने में भी सुन्दर है परन्तु उसकी पूंछ  नहीं है |


मौका हाथ से निकल गया

अब सज्जन बहुत दुखी हुए की काश मै  पहले या दूसरे हाँथी के साथ चला गया होता तो आज अपनी मंजिल तक जरूर पहुँच जाता पर निर्णय न ले पाने और लालच पर काबू ना रख पाने की वजह से दोनों अच्छे मौके गवां दिए | 

तो यहाँ पर हाँथी एक मौके के रूप में आया पर उसे लपकने में देरी तथा लालच ने सारा काम बिगाड़ दिया | आपके पास भी ऐसे कई मौके आएंगे कुछ अच्छे तो कुछ लुभावने परन्तु उनमे से अच्छे मौके को चुनकर अपनाने में देरी न करें अन्यथा अंत में हाँथी तो होगा पर पूंछ के बिना होगा |